गुरुवार, 18 अगस्त 2016

हमेशा सलामत रहे बहिन


अनुभूति
नेह
नीर
प्रण
समर्पण
साहस
आस
और विश्वास
की बेहद ख़ास
लड़ी
आपकी
राखी
बांध ली है
कलाई पर ठीक वहीं
जहां, बांधी थी आपने
पिछली बार
और हां
तिलक भी वहीं है
माथे के ठिक
बीचोंबीच
लड्डू भी है
नारियल वाली
पर बहिन
आपके होने न होने में बहुत फ़र्क है
मईया ,आपको हमेशा खुश रखे,
फ़िलहाल
आँख भर प्रार्थना
हृदय भर शुभकामना
आत्मा भर दुलार
हाथ भर आशीष
आपकी दुनियां
हमेशा सलामत
रहे बहिन।।।।।।
                अनहद

शनिवार, 2 अगस्त 2014

शुक्रिया

मैत्री दिवस की आप सभी मित्रो को हार्दिक मंगलकामनाये।।। सलामत रहे यारों की दुनिया ,चलता रहे यारों का कारवां ।।।मुझे दोस्ती का ककहारा सिखाने वाले दोस्तों की चौकरी के लिए "शुक्रिया"

"शुक्रिया"

दिया वरदान जिन्होंने
आप सब से दोस्ती का,
सबसे पहले देवी मंदिर की
उन ,माँ भगवती का शुक्रिया।

शुक्रिया, गुरुवर
आरके सिंह और मो.तारिक जी का

शुक्रिया सफ़ेद बोर्ड ,डेस्क,बेंच,
अकाउंटस और गणित की किताबों का

शुक्रिया,सेन्ट्रल स्कूल,गन्नीपुर की उन
आरी- तिरछी गलियों का

शुक्रिया,कलमबाग चौक से मिठनपुरा के
उबड़-खाबड़,उखड़े-बिखड़े सड़को का

शुक्रिया, नीम चौक के आगे वाली
 रेलवे गुमटी का

शुक्रिया, डेजी -अभिषेक के
घर के उस आहाते का

शुक्रिया, झमाझम बारिश से लबालब भरे
मोतीझील,कल्याणी,तिलक मैदान रोड का

शुक्रिया, अघोरिया बाज़ार के उस
 पंक्चर लगाने वाले का

शुक्रिया,उन तीन साईकिलों का

शुक्रिया,नारियल के लड्डू,छोले
और मूली के अचार का

शुक्रिया, बहिन
शुक्रिया, गुड़िया
सतीश, शुक्रिया.......।।।

मंगलवार, 22 जुलाई 2014

तेरा -मेरा रिश्ता

मन के अंदर
द्वन्द उठा है,
बड़ा बवंडर
घूम रहा है
पूछ रहा हैं,
जोर- जोर से
ओर-ओर से
तेरा- मेरा रिश्ता क्या हैं?

जटिल प्रश्न है
उत्तर क्या दूँ !
जो ख़ुद जानू
तब तो कह दूँ।

संबंधों के सब सांचों में
नामों के सब खांचों में
अदल-बदल कर रखकर देखा
थोड़ा ज्यादा थोड़ा गहरा
एक नहीं हर बार रहा है,
तेरा -मेरा रिश्ता।

शब्दकोश से नामकोश से
आगे का कुछ,
अनहद अव्यक्त
जिसको जाने बस दो अंतस।

कुछ और नहीं ,
बस अनुभूति है
तेरा -मेरा रिश्ता
हाँ, तेरा- मेरा रिश्ता ।।।

शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

सीएनएन आईबीएन से जबरिया निकाले गए 350 लोगों कि चुप्पी पर ..............



 टेलीविजन कि दुनिया (3)

 ख़बर निर्माण कारखानों में  
 24 गुणा 7 कि सक्रियता से
 थकावट ,रुकावट,शिकायत के बग़ैर    

 सूचना संभावना ,
 कल्पना दुर्भावना की 
 कुटाई,पिसाई,घिसाई में जुटे
 रीढ़ विहीन,आत्माहीन  

 कायर,कमजोर,कर्महीन कर्मचारियों की                  
 दुनिया है , टेलीविजन कि दुनिया 

शनिवार, 16 जून 2012

न्यूज़ रूम में जोकर


शीशे के पिंजरे में गुलामी करते मेहनतकश पर
बेवजह शब्दों का हंटर चलता बॉसनुमा  जोकर
अक्सर पिंजरे को अपनी सल्तनत समझ लेता है

भ्रम का शिकार जोकर उछलता है, चीखता है
मेहनतकशों पर अनायास , भौकने लगता है

खौफ और कुंठा से भरी शीशे की दिवार को देखर
टकला,तोंदवाला,कुंठित , बॉसनुमा  गीदड़  खुश होता है

शायद उसकी कोशिश नंबर बढ़ाने की है
शायद उसकी कोशिश अपनी औकात जताने की है

संभव है वो कोई साजिश  रच रहा हो
वो मेहनतकशों को नाकारा साबित करना चाहता हो

मकसद जो भी हो, मामला दया का है .
दुआ करिये पिंजरे में रहनेवालों का भ्रम बना रहे

ताकि बाहर की दुनिया सलामत रहे .. 
ताकि बाहर की दुनिया सलामत रहे .
         
                       अनहद 







शुक्रवार, 15 जून 2012

टेलीविजन की दुनिया

      1

बनावट की बुनावट में जुटे
बददिमाग,बदगुमान ,बदजुबान
आठो पहर जागते भागते 
शक्ल से आदमी दिखने वाले
आदमखोरों की दुनिया है 
टेलीविजन की दुनिया .........

   2

न्यूज़ रूम को क़त्लगाह बनाने वाले
आस्था ,श्रधा ,संवेदना को 
भून कर खानेवाले
भय,भ्रम,भूख के सौदागर    
फरेबी ,बहुरुपिए की दुनिया है
टेलीविजन की दुनिया ...
   

                                   अनहद 



सोमवार, 16 जनवरी 2012

हम और हमारा हिस्सा

अनहद याद
उजली रात
उनींद आँख की लडाई में
अनायास उसने कहा-
कुदरत हिस्से से ज्यादा
कभी किसी को कुछ नहीं देता !

तो क्या वो मेरे हिस्सें में नहीं थी ?
क्या मै भी उनके हिस्सें में नहीं था ?

माफ़ करना दोस्त
कुदरत का गणित ख़राब है
हिस्सा लगाना ,बाँटना शऊर का काम है |

जिस रोज बेशऊर कुदरत को यह शऊर आ जायेगा ,
उस रोज मुझे मेरे हिस्सें कोई शिकवा नहीं होगा |
और हाँ उस रोज, हम हिस्सों में नहीं होंगे
हम और हमारा हिस्सा एक होगा ||||

अनहद