मंगलवार, 22 जुलाई 2014

तेरा -मेरा रिश्ता

मन के अंदर
द्वन्द उठा है,
बड़ा बवंडर
घूम रहा है
पूछ रहा हैं,
जोर- जोर से
ओर-ओर से
तेरा- मेरा रिश्ता क्या हैं?

जटिल प्रश्न है
उत्तर क्या दूँ !
जो ख़ुद जानू
तब तो कह दूँ।

संबंधों के सब सांचों में
नामों के सब खांचों में
अदल-बदल कर रखकर देखा
थोड़ा ज्यादा थोड़ा गहरा
एक नहीं हर बार रहा है,
तेरा -मेरा रिश्ता।

शब्दकोश से नामकोश से
आगे का कुछ,
अनहद अव्यक्त
जिसको जाने बस दो अंतस।

कुछ और नहीं ,
बस अनुभूति है
तेरा -मेरा रिश्ता
हाँ, तेरा- मेरा रिश्ता ।।।

शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

सीएनएन आईबीएन से जबरिया निकाले गए 350 लोगों कि चुप्पी पर ..............



 टेलीविजन कि दुनिया (3)

 ख़बर निर्माण कारखानों में  
 24 गुणा 7 कि सक्रियता से
 थकावट ,रुकावट,शिकायत के बग़ैर    

 सूचना संभावना ,
 कल्पना दुर्भावना की 
 कुटाई,पिसाई,घिसाई में जुटे
 रीढ़ विहीन,आत्माहीन  

 कायर,कमजोर,कर्महीन कर्मचारियों की                  
 दुनिया है , टेलीविजन कि दुनिया 

शनिवार, 16 जून 2012

न्यूज़ रूम में जोकर


शीशे के पिंजरे में गुलामी करते मेहनतकश पर
बेवजह शब्दों का हंटर चलता बॉसनुमा  जोकर
अक्सर पिंजरे को अपनी सल्तनत समझ लेता है

भ्रम का शिकार जोकर उछलता है, चीखता है
मेहनतकशों पर अनायास , भौकने लगता है

खौफ और कुंठा से भरी शीशे की दिवार को देखर
टकला,तोंदवाला,कुंठित , बॉसनुमा  गीदड़  खुश होता है

शायद उसकी कोशिश नंबर बढ़ाने की है
शायद उसकी कोशिश अपनी औकात जताने की है

संभव है वो कोई साजिश  रच रहा हो
वो मेहनतकशों को नाकारा साबित करना चाहता हो

मकसद जो भी हो, मामला दया का है .
दुआ करिये पिंजरे में रहनेवालों का भ्रम बना रहे

ताकि बाहर की दुनिया सलामत रहे .. 
ताकि बाहर की दुनिया सलामत रहे .
         
                       अनहद 







शुक्रवार, 15 जून 2012

टेलीविजन की दुनिया

      1

बनावट की बुनावट में जुटे
बददिमाग,बदगुमान ,बदजुबान
आठो पहर जागते भागते 
शक्ल से आदमी दिखने वाले
आदमखोरों की दुनिया है 
टेलीविजन की दुनिया .........

   2

न्यूज़ रूम को क़त्लगाह बनाने वाले
आस्था ,श्रधा ,संवेदना को 
भून कर खानेवाले
भय,भ्रम,भूख के सौदागर    
फरेबी ,बहुरुपिए की दुनिया है
टेलीविजन की दुनिया ...
   

                                   अनहद 



सोमवार, 16 जनवरी 2012

हम और हमारा हिस्सा

अनहद याद
उजली रात
उनींद आँख की लडाई में
अनायास उसने कहा-
कुदरत हिस्से से ज्यादा
कभी किसी को कुछ नहीं देता !

तो क्या वो मेरे हिस्सें में नहीं थी ?
क्या मै भी उनके हिस्सें में नहीं था ?

माफ़ करना दोस्त
कुदरत का गणित ख़राब है
हिस्सा लगाना ,बाँटना शऊर का काम है |

जिस रोज बेशऊर कुदरत को यह शऊर आ जायेगा ,
उस रोज मुझे मेरे हिस्सें कोई शिकवा नहीं होगा |
और हाँ उस रोज, हम हिस्सों में नहीं होंगे
हम और हमारा हिस्सा एक होगा ||||

अनहद

शनिवार, 10 दिसंबर 2011

कहिये क्या उपहार दूँ


 आज के मुबारक दिन  पर  सबसे पहले मातारानी का बहुत बहुत शुक्रिया, उस वरदान के लिए ,जो बस   के  मुझे मिला है ...जन्मोत्सव की बहुत बहुत बधाई गुडिया ,जगदम्बा आपको  वो सब दें दें  जिसकी  आप   तमन्ना  रखती है ..जो आपके लिए जरुरी है ..आप हमेशा खुश रहे .भगवती करे  आप जल्दी ठीक हो जाये ...
    


दुआएं  देता चाँद दू  
         बधाई देती चांदनी 
या  चमकते  तारों  का आकाश दूँ 
        कहिये क्या  उपहार दूँ ?


मुस्कुराती सुबह  दूँ 
          खिलखिलाती दोपहरी 
या झूमती हर साँझ दूँ 
            कहिये क्या  उपहार दूँ ?

मनमोहक कोई ख्वाब  दूँ 
         हँसता हुआ ख्याल दूँ 
या ख्वाबों  का ही सतरंगी  संसार  दूँ 
          कहिये  क्या  उपहार दूँ ?

 बरसती हुई आँखे  दूँ 
 अनकहे जज्बात दूँ 
या स्नेह भरा मन भेंट  करूँ 
      कहिये क्या उपहार दूँ ?

छोटी छोटी खुशियाँ  दूँ 
यादों का सौगात  दूँ 
        या  खुशियों  का जहान दूँ 
कहिये क्या उपहार दूँ ?

कहिये क्या  उपहार दूँ ?
कहिये क्या  उपहार दूँ ?   
                                      
                                                  अनहद 



बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

मन मेरा .............

मन मेरा आज फिर से , हुआ बावरा
याद आयी वही ,हर वो कही -अनकही
नज़रों में दुबारा ,वो दौर जिंदा हुआ
खो गए शब्द सारे ,अश्क बहने लगा

चूक मुझसे हुई थी ,कही न कही
तभी तो मिली है ,सज़ा इतनी बड़ी
दोस्त , है आज फिर से ,दौरा पड़ा

ज़िद वही ,मासूम सी , है आज भी
ओठ सीला हुआ सा ,गला रुंधा हुआ

तर्क कोई नहीं ,सून रहा मन मेरा
मन सूनता कहा है ,किसी और का
मन है आज भी , बस आपका

हाँ , कल आज में , है फर्क बड़ा
तब साथ था , हूँ आज अकेला यहाँ
हां अकेला यहाँ ................

अनहद